• thelifeofsufi1 10w

    अबे तुम ग़रीब किसान हो बे , तुम्हे जीने का हक़ कैसा
    तुम खून पसीने से सीचों , मनमाना देंगे हम पैसा

    तुम दाम मांगो गे हमसे , तुम्हारी इतनी जुर्रत है
    हम खाल उतरेंगे सुनलो , तुम्हे क़र्ज़ से मारेंगे सूनलो

    अबे तुम ग़रीब किसान हो बे , तुम्हे जीने का हक़ कैसा

    हमारे टैक्स के पैसों से , तुम मुफ्त इलाज कराते हो
    हम नीति, रणनीति बनाते हैं , तुम लाभ सभी उठाते हो

    जहां अस्पताल में जाते जाते , दम टूट ही जाता है
    मुफ्त दवा भी देने की खातिर , बाबू कुछ पैसे खाता है

    अबे तुम ग़रीब किसान हो बे , तुम्हे जीने का हक़ कैसा
    ©Sufi