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    माँ

    हर बिगड़े मसले को सुलझते देखा है,
    तेरे पाँव को छूने का असर देखा है।
    ना होने पे मेरे तेरे आंखों में फिकर देखा है,
    वो जो सामने आ जाऊ तो
    उन आंखों में चमक देखा है।

    -आकाश सेठ
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