• nodukaswati 24w

    काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था
    खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था
    कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में
    वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था