• sadhnakumari 10w

    थामे हाथ

    बचपन में थामे हाथ पिता का हम चले थे,
    जीवन में बस आगे बढ़ने के वादे किये थे।
    सौ बार गिरे थे फिर भी हम उठ खड़े हुए थे,
    क्योंकि दृढ़ इच्छाशक्ति साथ लिये थे।
    याद करो अपने पितृ के वो सहारे,
    जो थे हर संकट में साथ तुम्हारे,
    तुम ही थे जो सुनाते थे पूरे दिन के अच्छे-बुरे नजारे।
    अब क्यों बेबस हो जाते हो, जब पिता की बारी आई,
    कहते हो बहुत व्यस्त हो, करने में काम काज सारे।
    ज्यादा समय नहीं है न सही, पिता ने माँगे हैं दो पल यूँ ही,
    बैठकर देखो आज उनके साथ,
    दुख तो बाँटो उनके दो चार।
    महसूस करो पिता के साथ बिताए बचपन के पल वो सारे।
    कर न पाओगे जितना उन्होंने किया है,
    हर सुख में औलाद को आगे रखा है,
    दुख को कभी न पास आने दिया है,
    तुम भी बन जाओ न उनका इक सच्चा साथी,
    फिर बन जाएगी तुम्हारी अनोखी कहानी।।
    ©sadhnakumari