• rajnikant 23w

    मेहमान

    कुछ वक़्त चाहिए था तुम्हारा, कुछ बातें बतानी थी तुम्हें
    ठीक से मिलो तो सही, तुम्हारे कर्मों की सज़ा सुनानी थी तुम्हें
    यूं तो मशरूफ हो अपने जीवन में,अपनों से ही अंजान हो
    शायद हमारी ज़िंदगी में भी कुछ दिन के ही मेहमान हो..

    कोशिश की पर शब्दों में बतलाना है मुश्किल बहुत
    इतने प्यार के बाद जुबां पे कड़वाहट लाना है मुश्किल बहुत
    ध्यान से सुनना लफ़्ज़ों में और पढ़ना भी इस मुस्कान को
    शायद हमारी ज़िन्दगी में भी कुछ दिन के ही मेहमान हो...

    समय के साथ रिश्ते नए बना लिए तुमने अज़ीज़ काफी
    सिर्फ हमारा ही ये हाल है या तुम्हारे इरादों के रहे मरीज़ काफी
    सुनो, व्यस्त इतना भी मत होना कि और रिश्तों का भी नुकसान हो
    शायद हमारी ज़िन्दगी में भी कुछ दिन के ही मेहमान हो...

    ज़रूरतें ज्यादा रहीं और उम्मीदें टूटने का भी शक़ था
    गुरूर रहा रिश्तों पे और नराज़गी का भी हक था
    अब तुम पे गुमान नहीं, बस खुद की नज़रों में सम्मान हो
    शायद हमारी ज़िन्दगी में भी कुछ दिन के ही मेहमान हो...


    ©Rk