• neha_netra 23w

    *मैं एक लड़की हूँ!!*

    शुरुआत तो तभी हो गयी
    जब मैंने जन्म लिया
    डाक्टर ने पापा को बोला
    मुबारक हो"लड़की हैं"!!
    तब से आज तक वो सिलसिला रुका ही नहीं

    पैरों में छनछन करती उस पायल ने एहसास कराया कि"हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    हाथों में बैट-बाँल की जगह फ्राँक में लिपटी उस गुड़िया ने एहसास कराया कि "हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    देर रात को घर से बाहर निकलने पर उस विरोध ने"ज़माना बहुत खराब है" एहसास कराया कि"हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    सड़क पर घूरती उन ललचायीं नजरों ने एहसास कराया कि "हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    मेरी अस्मिता पर आयी जो आँच तो उस Medical test report ने एहसास कराया कि "हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    समाज द्वारा सम्मानित उन फटकारों ने एहसास कराया कि "हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    "बेटियाँ पराया धन होती हैं" इस जुम़लें ने एहसास कराया कि "हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    हद तो तब हो गई जब आयी बात पिता को मुखाग्नि देने की "बेटा नहीं हैं"??
    उस शब्द ने एहसास कराया कि "हाँ मैं एक लड़की हूँ"।

    सारे सुबूत जहाँ मुझे लड़की साबित कर रहे थे
    वहीं मेरे अंदर कोई रो-रो के कह रहा था "मैं एक इन्सान हूँ"।
    ©neha_netra