• the_thoughtist 23w

    इस तरह

    ये मालूम था बिछड़ जाओगे तुम इक दिन
    मगर लगा नही था इस तरह
    मौसम बदलते ही पत्ते छोड़ जाते है
    पेड़ो की आगोश जिस तरह

    ये मालूम था अहमियत मेरी अब वैसी नही
    मगर लगा नही था इस तरह
    कभी मुड़कर वापिस नही आओगे तुम
    मेरे जाने की जल्दी हो जिस तरह

    ये मालूम था लोग ताउम्र साथ नही होते
    मगर लगा नही था इस तरह
    चेहरा भी पहचानने से इन्कार कर दोगे
    किसी अजनबी को देखा हो जिस तरह

    ये मालूम था चीज़े बिगड़ रही है हमारे बीच
    मगर लगा नही था इस तरह
    कोई रास्ता नही जोड़ पाएगा इन फसलों को
    हम कभी मिले हि ना हो जिस तरह

    ये मालूम था मै तुम्हारे काबिल नही शायद
    मगर लगा नही था इस तरह
    भीड़ मे भी तन्हा रहे जाऊँगा 
    किसी ने ठोकर मारा हो जिस तरह
     
    ये मालूम था मेरी गलतियाँ बेहिसाब है
    मगर लगा नही था इस तरह
    फलक से ज़मीन पर आ गिरेगा मेरा दिल
    किसी दूसरे की जगह बनानी हो जिस तरह

    ये मालूम है मुझे कोई फायदा नही अब इन बातो का
    मगर इन्तजार आज भी है तुम्हारा इस तरह
    बंजर ज़मीन देखती हो रास्ते
    बरसते बारिश की जिस तरह

    ©the_thoughtist