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    Inspiration:- Shrimad Bhagwat Geeta
    KrishnSaar��

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    अहंकार

    मनुष्य का दंभ (अहंकार)
    जब आसमान से ऊंचा
    हो जाता है,
    तब उसे अपने महान होने की
    भ्रांति हो जाती है।
    और उसी भ्रम में
    वो अनुचित व्यवहार करने
    लगता है।
    जो अंततः पश्चाताप का ही
    कारण बनता है।

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