• akarshitasingh_ 5w

    काश! तुम क़भी ये समझ पाते कि जो आज इस पल में है, जो आज तुम्हारे साथ, तुम्हारे लिए है , जिस आज में तुम हो, तुमने क़भी ऐसे ही आज का इंतजार सालों से किया था।
    तुमनें क़भी ऐसे ही आज में अपनी खुशियाँ संजोई थीं, ढूंढ़ी थी , बसायी थी।
    और आज तुम फ़िर क़िसी और आज में अपनी खुशियाँ सजों रहे अपने इस आज को छोड़कर।।
    ©akarshitasingh_