• meatrikha 19w

    एक रोज़ उसने पूछना बंद कर्दिया,
    तुम कैसी हो,
    मैंने भी इसलिए नहीं बताया,
    मुझे इंतज़ार था उसके पूछने का,

    ऐसा नहीं है कि वो याद नहीं था,
    ऐसे भी नहीं है कि वो पसंद नहीं था,
    मैं उसकी आवाज़ सुनने के लिए,
    ये जरिया चुन चुकी थी,

    उसके मुंह से अपना नाम सुनना अच्छा,
    लगता था जैसे वो सच में पुकार रहा हो,

    ज़ाहिर करने की हिजक थी।
    पसंद तोह वो बहुत था,
    मगर कहने की हिम्मत ना थी।

    ©meatrikha_quotes