• manish_tripathi 31w

    इस दीये की लौ भभक रही है
    शायद तुम आये हो क्या
    वैसे भी कितने दफ़ा आते हो जाते हो
    हर बार बिना कुछ कहे,
    बिना मिले निकल जाते हो
    तेरी परछाई दीवार पे बनती है
    और फिर धीरे धीरे ये दीवार उन्हें शोख
    लेता है जैसे किसी प्यासी जमी पे बारिश की पहली बून्द गिर के बारिश बंद हो जाती है !!

    ©BrokenHeart
    -ManishTripathi