• mithyasach 5w

    सच्चाई

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    रिश्तों को लड़वाते हैं
    फिर सच्चाई को रोते हैं;

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    घोटाले जो करते हैं
    फिर सच्चाई को रोते हैं;

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    पाखंड को परोसते हैं
    फिर सच्चाई को रोते हैं;

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    निराशा घोर फैलाते हैं
    फिर सच्चाई को रोते हैं;

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    बेटी को मरवाते हैं
    फिर सच्चाई को रोते हैं;

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    बहुओं को रूलाते हैं
    फिर सच्चाई को रोते हैं;

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    माँ-बाप को सताते हैं
    फिर सच्चाई को रोते हैं;

    चेहरों पर मुखौटे है
    हैं हमदर्द या खोटे हैं?
    मित्रों के न बन पाते हैं
    फिर सच्चाई को रोते है;

    आज
    सच्चाई बहुत घिनौनी है
    न किसी ने ,जानी है,
    ऊपर की लीपा-पोती में
    सब ने इतिश्री मानी है

    पर
    सच्चाई में गजब की ताकत है,
    ये न सौ पर्दों में भी रहने वाली है,
    इसके अपने चाहने वाले हैं,
    इसकी पैरवी करने वाले हैं,
    जग का भला वो करने वाले हैं,
    कम मुश्किल नहीं जिनकी राहें
    वो इस पर जान -न्यौछावर करने वाले हैं...



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