• shanky1107 10w

    ना जाने क्यों
    चांद फिर अजनबी सा रहा,

    ना जाने क्यों
    चांद फिर अन छुआ सा रहा,

    ना जाने क्यों
    उम्मीद कम नहीं हुई फिर भी,

    ना जाने क्यों
    दास्तानें सफर भी मंज़िल से कम ना रहा।