• monikakapur 6w

    कुछ पल ज़िंदगी की गुल्लक में डाले थे
    गुल्लक फोड़ी तो तजुर्बे बाहर निकले
    सीखा गए जीने का शऊर हम को
    बना के हम को ज़रा होशियार निकले
    कह गए कि दिल टूटने से बचाना है ग़र
    उम्मीदों से हो दरकिनार निकलें
    ख़्वाब तो ख़्वाब हैं हक़ीक़त कभी ही होते
    हक़ीक़तों की पालकी में हो सवार निकले
    तजुर्बे ही सिखाते हैं जीने का हुनर
    किसी की रूह से नज़र आर पार निकले
    ख़िज़ाँ को भी ज़रा जी भर देखें तजुर्बा कहता है
    नहीं ज़रूरी की हर बार मौसमे बहार निकले
    ©monikakapur