• nanditasharma 24w

    सृजन

    कौन है पदचाप जिसकी
    दूर से देती सुनाई
    कौन आना चाहता है
    पर नहीं देता दिखाई ।
    पग है कोई बादलों का
    या धरा का पाँव कोई
    आहटों पर कान हैं,
    मन सुन रहा आवाज़ कोई ।
    चेहरा यह कैसा है कि जिसका
    है नहीं आकार कोई
    अतिथि मेरा है, मगर है
    मुझसे ही अनजान कोई ।
    एक सागर हरहराता,
    सीप में मोती छिपाता
    बढ़ रहा तट की तरफ क्यों ?
    कलम कागज़ में समाता ।
    कौन है यह कौन बोलो ?
    कौन है यह मुस्कुराता......!
    . सृजन है यह गुनगुनाता.......!!!
    ©nanditasharma