• kumarsaurabh29798 9w

    "एक उम्मीद"

    आज मैं तेरे घर के बाहर खड़ा हूँ,
    2 महीने से आसमां को चीर के,
    हवाओं से लड़ा हूँ,
    11 बरस मैंने इंतज़ार किया है,
    लाखों मील का मैंने सफर किया है,
    तेरा ये आशिक यूँ घूम रहा है,
    जरा मिल ले मुझसे ए चाँद,
    आज मैं तेरे इतने पास हूँ,
    पूरा हिन्दोस्तां मुझे ढूंढ रहा है,
    मैं करोडों हिंदुस्तानियों की आस हूँ,
    " चन्द्रयान-2"

    "कुमार सौरभ"