• varshukashyap 31w

    हम अक्सर शिकायत ही तो करते हैं

    वो नाराज़गी लिए फिरता है
    जाने किस अकड़ में अकड़ता है
    वो चंद मिनटों में रो पड़ता है
    जाने किस ग़म में डूबा है जो उभरने से डरता है
    वो ज़रूरत से ज़्यादा बेबाक है
    खुद को खुदा और औरो को गुलाम़ समझता है
    वो फूहड़ता से हंसता है
    किसी के जज़्बात भी नहीं समझता है
    सिर्फ़ शिकायतें ही तो करते हैं हम
    सिर्फ़ कमीयाँ ही तो देखते हैं हम
    कमी के पीछे का मूल नहीं समझते
    हम अक्सर शिकायत करते हैं।
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    शिकायत

    ©varshukashyap