• the_limit 23w

    किताब

    जो तुम्हारे जाने के बाद मैनें अधूरी छोङ दी थी
    वो किताब आज मैं फिर से पढना चाहती हुँ
    मैं उस किताब की सौंधी महक में फिर से खो जाना चाहती हुँ
    वो जो अल्फाज़ मैनें यूँ ही लिख दिये थे उस किताब में
    उन्हे फिर से महसूस करना चाहती हुँ
    उस किताब का वो पन्ना जिसे मैनें बिना पढे ही पलट दिया था
    आज उसे फिर से आँखो की गहराईयों में छुपा लेना चाहती हुँ
    वो जो पन्ने का कोना मैनें याद के लिए मोङा था
    आज उसे मैं फिर से याद करना चाहती हुँ

    तुम मेरी उस किताब की तरह हो
    जिसे मैं आज फिर से पढना चाहती हुँ!!!

    ©the_limit