• maverick_sg 10w

    अक़सर मैं सोचता हूँ,
    कि क्या ग़लत है,
    लोगों से मिलना, उनसे जुड़ना,
    ज़िन्दगी में उनके घुलना,
    और ख़ुद को उनके साथ रखना,
    या फिर अपेक्षाएं?

    बार बार ये सवालों की सुई,
    अपेक्षाओं की ओर ठहरती है,
    मैं हर बार सहम जाता हूँ,
    कि अपेक्षाओं की नयी संदूक में,
    इस बार क्या नया होगा,
    कैसे पूरा करूँगा?

    मैं टटोलता हूँ,
    मैं खोजता हूँ,
    मैं अक़सर सोचता हूँ!!