• mariyam94 5w

    कम्बख़त isaq

    अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है वो छुपाये कैसे
    तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आये कैसे।
    घर सजाने के तसव्वुर तो बहुत बाद का है
    पहले ये तय हो इस घर को बचाये कैसे।

    तेरी ज़ुबान की तलवार बढ़ती रही मेरी तरफ
    पर मुझे सर झुकना आता नही तो सर झुकाये कैसे।
    मुझ पर कहकहा लगा कर लहजा बदलने वाले,
    तुझे भला मेरे आंसू नज़र आये कैसे...

    तेरी सोच छोटी थी,तू अपनी नज़र से देखता था दुनिया को
    भला एक क़तरे को समंदर नज़र आये कैसे....

    ©mariyam94