• nehulatagarg 35w

    जिसमें घटनाक्रम तो सच्चे थे मगर जिस तरह से उनकी सच्चाई को बयां किया गया था वो सच नहीं था और आज यहाँ सच और झूठ के बीच जंग नहीं थी बल्कि जंग तो सच और उसमें छुपी सच्चाई के बीच थी जिसमें जीत दोनों की नहीं लेकिन हार दोनों की जरूर थी । अनन्तिमा कटघरे में थी पौर्थस के सामने और दोनों एक - दूसरे को मायूसी से देखते हुए उसी सच की सच्चाईयों के बारे में सोच में डूबे हुए थे और दोनों ही समझ नहीं पा रहें थे की , इस स्थिति में दोनों किस तरह से प्रतिक्रिया दें और तभी नीलेश अनन्तिमा के पास आते है और कटघरे के पास खडे होकर उससे सवाल पूछने लगते है - अनन्तिमा जी , क्या आप जानती है की , आपके सामने कौन खडे है ? तो अनन्तिमा पौर्थस का नाम बताती है और फिर अगला सवाल पूछने लगते है - आप कब से जानती है इन्हें ? मेरे कहने का मतलब है की , आप पहली बार इनसे कब मिली थी ? तो अनन्तिमा पहली मुलाकात के बारे में बताती है और जिसे सुनने के बाद नीलेश अनन्तिमा से पूछने लगते है - आपने यह तो बता दिया की , आप दोनों की मुलाकात कैसे हुयी लेकिन यह नहीं बताया की , आप दोनों के बीच एक रिश्ता है और वो है पति - पत्नी का और यह सुनकर दोनों चौंक जाते है और काव्य भी इस बात पर एतराज जताते है और जज साहब भी उनके इस एतराज पर गौर फरमातें है और उसे स्वीकार करते है तो नीलेश अपनी बात को सिद्ध करने के लिये कुछ कागजात जज साहब के सामने पेश करते है और नीलेश बताने लगते है अदालत को की , मिस्टर पौर्थस और मिस अनन्तिमा के कोर्ट मैरिज के कागजात है यह और इस बात को सुनकर सबके पैरों तले से जमीन खिसक जाती है और किसी को भी समझ नहीं आता की , आखिरकार यह सच क्या है ? इस बात को लेकर फिर से कानाफूसी शुरू हो जाती है सबके बीच और जज साहब के चुप होने के आदेश पर सब चुप हो जाते है । नीलेश अनन्तिमा से सवाल पर सवाल दागते चलें जाते है और वो उनमें से किसी का भी जवाब ठीक से नहीं दे पाती क्योंकि उसे स्पष्टीकरण का मौका नहीं दिया जाता । लंच ब्रेक के बाद सुनवाई का आदेश दिया जाता है कोर्ट की तरफ से और सब बाहर कोर्टरूम से आ जाते है ।

    Read More

    अनकही दास्तां

    का मौका ही नहीं दिया जाता । लंच ब्रेक के बाद दुबारा सुनवाई का आदेश दिया जाता है और सब कोर्टरूम से बाहर आ जाते है । पौर्थस सिपाहीयों के साथ गलियारें में रखी बेंच पर बैठे होते है और उन्हीं सब घटनाक्रमों के बारे में सोच रहें होते है जिनका जिक्र उन्हें एक अलग ही रंग दे रहा था और वो पीछे उसी वर्तमान में पहुंच जाते है जो अब गुजरे कल का प्रतिक था लेकिन आज वही कुछ और ही बन गया था और उसके अस्तित्व को भी कुछ और ही बना दिया गया था । जब होटल से खाना खाकर उठी अनन्तिमा तो अन्दर से कोई अधेड उम्र की एक महिला अनन्तिमा से सर से टकराती है और दोनों ही अपने सर को सहलाती है और फिर वही अधेड उम्र की महिला अनन्तिमा से एक बार और सर टकराने को कहती है तो अनन्तिमा मना कर देती है मगर वो नहीं मानती और फिर से हल्के से सर टकराकर चली जाती है और अनन्तिमा उनकी इस हरकत पर हैरानी से मुस्कुरा कर रह जाती है । अनन्तिमा और पौर्थस गाडी में बैठकर आगे बढते है लेकिन बीच रास्ते में ही गाडी के इंजन में कोई खराबी आ जाती है और उसे ठीक कराने के लिये एक गैरेज में लेकर जाते है जहाँ मिस्त्री दो - तीन घंटे की बात कहता है । पौर्थस और अनन्तिमा वहीं बैठे होते है और तभी एक और गाडी वहाँ आती है जिसमें से एक बाइस साल की उम्र का लडका और उतनी ही उम्र की एक लडकी बाहर निकलते है और दोनों जिस जगह बेंच पर बैठे रहते है वहीं उनके पास आकर उनसे मदद मांगते है और जब वो उस मदद के बारे में पूछते है तो वो बताते है की , वो दोनों एक - दूसरे से प्यार करते है और शादी करना चाहते है लेकिन उन दोनों के घरवालों को यह मंजूर नहीं है और इसीलिये वो भागकर कोर्ट मैरिज करना चाहते है लेकिन उन्हें दो गवाहों की जरूरत है क्या वो दोनों उनके गवाह बन सकते है ? अनन्तिमा तो फिर भी सवाल करती है की , वो दोनों तो उन्हें जानते भी नहीं है तो फिर क्या उनके लिये उनका गवाह बनना सही होगा लेकिन पौर्थस तैयार हो जाते है और फिर चारों मिलकर वहाँ पहुंचते है जहाँ उन दोनों गरिमा और अभिनव की शादी हो जाती है और गवाहों के रूप में उन