• loveneetm 5w

    प्रेम भक्ति अर्थ

    अनुभूति प्रेम की,
    हृदय करे दिन रात,
    प्रेम समर्पण भाव है,
    जो भर दे मन के घाव,
    भक्ति प्रकाष्ठा प्रेम की,
    जहाँ भाव में केवल ध्यान,
    ना मन काम वासना,
    ना हृदय लोभ अभिमान,
    राधा कृष्ण,गिरधर मीरा,
    दोनों में कैसा भेद,
    राधा के बिन कृष्ण नहीं,
    गिरधर बिन मीरा खेद,
    राधा प्रेम वशीभूत हो,
    हर भाव रखे संजोए,
    हठ क्रोध विरह अश्रु,
    सब मोहन के संग होए,
    मीरा भक्ति लीन हो,
    मन भाव सभी मिटाएँ,
    प्रियतम के निज चरनन में,
    अपना सर्वस्व लुटाएँ,
    बदला इस युग कुछ नही,
    बदली केवल सोच,
    कलयुग में ईर्ष्या पर,
    नहीं किसी का रोक,
    इस कारण राधा मीरा में,
    भेद करे समाज,
    प्रेम भक्ति छोड़कर,
    लोभ करे मन राज।
    @लवनीत