• saanjh_ki_awaz 23w

    मैं भला ऐसे क्यूँ न देखूं तुम्हें ?
    तुम्हारी लहराती जुल्फें-
    मानो लहराती घटाओं का साया हो..
    आँखें झीलों सा झिलमिल,
    मानो इसमें मेरा अस्तित्व समाया हो |
    मैं भला ऐसे क्यूँ न देखूं तुम्हें ?
    ये जो होंठ हैं तुम्हारे
    मानो गुलाब की पंखुड़ियों को कमान पर सजाया हो|
    रुखसार की लाली ऐसी है,
    मानो ऊगते सूरज की किरण भी देख-देख शर्माया हो |
    मैं भला ऐसे क्यूँ न देखूं तुम्हें ?
    ©saanjh_ki_awaz