• rjmanjeri 70w

    ख़्वाब

    यूँ ख़्वाबों में अक़्सर तुम आते रहे हो।
    हमें रात भर क्यूँ जगाते रहे हो।
    कभी बात करने की हमने जो सोची।
    हमें फ़ासले क्यूँ दिखाते रहे हो।
    शिकायत करे कोई तुमसे तो कैसे।
    हर एक ख़्वाब पलकों से ढाते रहे हो।
    गुज़रती है अक़्सर इन आँखों में रातें।
    तुम आंखों से नींदें चुराते रहे हो।
    ©Rj Manjeri