• quaintrelle07 9w

    बैठी हूँ में 'गुमसुम'
    हाथ में कागज़ और कलम ले कर
    पर मेरी नजरे कही और हैं
    वो देख रही है उस पेड़ को
    कितना शांत और निर्मल लग रहा हैं
    हवा का झोंका उसे प्रेम से छू कर गुजर रहा हैं
    पंछियों के झुण्ड ने उस पे शोर मचा दिया हैं
    तितलियों के रंगों ने उस पे इन्द्रधनु बना दिया हैं
    ये सारा नजारा दिखने में काफी खूबसूरत लग रहा हैं
    पर असलियत में
    एक के बाद एक सूरज की तपती किरणें
    उस पे वार कर रही हैं
    वो बेचारा अंदर ही अंदर जलता जा रहा है
    कोई आ रहा है कुल्हाड़ी ले कर उसे काटने
    फिर भी वो खामोश रह के उसे छांव दे रहा है
    कोई खा रहा हैं फल उसके
    कोई पत्ते उजाड़ रहा हैं
    कोई उखाड़ रहा है उसको सिर से ले कर पाँव तक
    फिर भी वो 'गुमसुम' खड़ा हैं,
    बिलकुल मेरी ही तरह |
    ~Vaishnavi ♥️
    ©quaintrelle07