• akanshatiwari 5w

    जीवन एक संग्राम

    अनगिनत पहेलियों में उलझा
    जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा
    सफलता की होड़ में भिड़ा
    पल भर विश्राम तत्पश्चात कार्य कर रहा
    जीवन संग्राम में मनुष्य लड़ रहा

    एक पतंग के भांति जिंदगी
    डोर बांधे नींव तैयार कर रहा
    आसमाँ को छूने के लिए तत्पर
    यात्रा संताप सह रहा
    जीवन संग्राम में मनुष्य लड़ रहा

    भावी हलचलों की आशंका
    मुकाबले हेतु सर्वदा कटिबद्ध
    नित्य नूतन योजनाओ का निर्माण
    चक्की में गेंहू समान पिस रहा
    जीवन संग्राम में मनुष्य लड़ रहा
    ©akanshatiwari