• sachinarton_ 5w

    हकीक़त देख कर हमारी,
    संभलना सीख रहा हूँ,

    पर जो तुमने ख़्वाब दिखाए थे,
    वो आज भी ख़्वाबों में आया करते हैं,

    तुमने ज़रूर कुछ चुराया है मुझसे,
    सुना है आजकल सुकून बहुत है तुम्हारे पास,

    कुछ दर्द बांट तो सकता हूँ तुमसे,
    पर कम्बख़त तोहफ़े लौटाए नही जाते।

    - आर्टन