• inside_leaf 9w

    हजारों तम्मनाओं से सवारा था
    सबसे ज्यादा तुझको चाहा था
    मगर मै तो पन्नों पर बैठे
    उन शब्दो सा था
    जिसका अर्थ तो बस पढ़ने वाले को था

    कुछ पल यू ही गुजरे
    जैसे अरमानों की अधूरी कश्ती
    समय चलता रहा
    और मै बस बिखरा सा रहा

    वो अंधेरी सी रात
    और वो दिया जलता रहा
    उस रोशनी में तेरी चाह
    मेरी तनहाई सी दिखी

    कौन ही तन्हा था
    मै ही खोखला था
    और फिर ना ही मै
    और ना ही मेरी तनहाई बची

    ©inside_leaf