• pankhuri09 10w

    ख़ुद को खोकर तुझको पाया,
    तुझको पाकर ख़ुद को जाना

    जाने तुम क्या हो जाने तुम्हें क्या कहूँ ,
    बुलाऊँ तुम्हें अपनी दवा यह समझू तुम्हें अपनी एक लत,

    जो भी, जैसे भी हो तुम
    दिल चाहता है कि बस मेरी बनकर रह जाओ तुम ।मेरी परी, मेरी ज़िंदगी हो तुम
    मेरे ज़िंदा होने का अहसास हो तुम।।

    डर लगता है तुम्हें खोने के ख़याल से,
    लगता है जैसे तुम्हारा तुम्हारे बिना न होगी शाम और न ही होगा सवेरा

    सब यूँ ही थम सा जाएगा तुम्हारे बिना
    उजाला भी अंधेरे की याद दिलाएगा
    और ये अंधेरा तुम्हारी यादों से गुफ़्तगू करवाएगा।।

    जानता हूँ मैं कि माँग रहा हूँ तुमसे कुछ ज़्यादा ,
    बस दे दो तुम मुझे अपना ये दिल आधा।
    वादा है मेरा ख़ुश रखूँगा तुम्हें
    फिर चाहे लड़ना पड़े पूरी दुनिया से मुझे।।

    ©pankhuri09