• deadbody 9w

    देरी से

    उन्होंने कहा मुझे पता नहीं था तुम मेरे लिए गलत थे ,
    मगर मै हैरान हूं के इतने देर से क्यों पता चला ।


    सोच तो मेरी पहले से ही तुम तक सीमित रही है,
    फिर अब क्यों नहीं भा रही है।
    फर्क पड़ता है मुझे इसलिए के बैठा
    अगर होती भावना ना फर्क पड़ने की तो शायद मै भी चुप रहता ।


    मकान कच्चा था , बारिश में भी बेह गया ,
    बचे हुए अरमानों का मलबा रह गया ,
    कहना तो तुमसे मुझे भी बहुत कुछ है ,
    तेरे बिन दिल नहीं लगता , पागल सा फिरता हूं ,
    मगर क्या तुम्हे सुनाई देगा , यही सोच के मैं चुप रह गया ।

    शिकायत बहुत थी ना मेरे चिल्लाने से ,
    आंसूओं को पीना सीख गया हूं ,
    तुमने जैसा बताया मुझे वैसा अपने आप को मान के चुप रहना सीख गया हूं।


    जब्जबतों से भरी गंदी जुबां था मै,
    तुमपे हाथ उठाने वाला कायर था मै,
    गलत को सुधार कर आगे बढ़ने की कोशिश था मै,
    फिर पता चला गलत सोच का पिटारा था मै ,
    कभी तेरा सहारा लेकिन आज खुद बेसहारा था मै।।।
    ©deadbody