• apurva_igotsar 23w

    पोटली

    "जानती हो इस शहर में एक आदमी का खर्चा कितना आता है? ऊपर से बेफिजूल तुम्हारा खर्चा अलग। गाँव क्यों नही चली जाती तुम!"

    बेटा एक साँस में फ़िर बोला,

    "बाबूजी कोई संपत्ति भी नही छोड़ गए। तुम्हारा यहाँ कोई काम नही अगर तुम्हारे पास कुछ देने को नहीं है तो। कल सुबह की ट्रेन का टिकट है, सामान बाँध लो।"

    "कुछ है क्या देने को...कुछ है क्या देने को.." बस यही शब्द कानों में गूँज रहे थे। ऐसा लगा मानों दिल चीर कर भी अगर उसमे छुपे प्यार को आज वो दिखा दे तो भी वो कम ही पड़ जाएगा।
    इसलिए चुपचाप अपने प्यार की पोटली बांधे आज एक और माँ गाँव को लौट आयी थी।
    ©apurva_r