• ubhayhastkushal 9w

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    लिखता है वो, आखिर क्यों (भाग - दो )

    -Shubham Joshi
    ©ubhayhastkushal

    लिखता था वो बचपन से ही
    लिख रहा है वो वर्तमान में भी
    शायद भविष्य में भी वो लिखेगा ही

    पर आखिर क्यों
    वो लिखते हुए रुका नहीं
    क्या वो लिख लिख कर
    कभी थका नहीं

    आखिर क्या है
    उसकी मजबूरी
    क्यों है उसके लिए
    लिखना इतना ज़रूरी

    इतने नये विषयों पर वो कविताएँ
    कहाँ से बनाता है
    इतना सब उसके दिमाग में
    कहाँ से आता है

    अब तक तो जान ही गए होंगे
    आप लोग
    शायद है उभयहस्तकुशल को
    कोई मानसिक रोग

    कह कर ऐसा जब मैंने
    उन लोगों की और सर घुमाया
    सामने अपने मैंने
    किसी को नही पाया

    शायद उनको मेरी कहानी
    अच्छी नहीं लगी
    प्यार की कहानी पसंद करने वालों को
    शायद मेरी दर्द भरी दास्ताँ सच्ची नहीं लगी

    छोड़ गए वो लोग मुझे अकेला
    कह कर मुझे नकारात्मक और थकेला

    पर यह अकेलापन
    मुझे खा रहा है
    पर मेरी रचनात्मकता
    को वो बढ़ा रहा है

    वो प्यार नहीं था जिसने मुझे लिखना सिखाया
    वो अकेलेपन में पनप रहा डर था
    जो मुझे इस मार्ग पर ले आया

    इस अकेलेपन में मैं खुद को ही
    अपनी कहानी सुनाने लगा
    ऐसा लगा जैसे मेरे दिल मे
    एक हल्कापन आने लगा

    लिखता है वो क्योंकि
    वो नहीं चाहता भीड़ में खोना
    लिखता है वो क्योंकि
    अपनी अलग पहचान बनाने का देखता है वो सपना

    नहीं बना रहना चाहता वो
    भीड़ का हिस्सा
    उसके जीवन के उपन्यास का
    लिख रहा है वो एक छोटा किस्सा

    ये लेखन ही है जो उसे
    बनाता है औरों से अलग
    कुछ अलग करने की चाहत
    और रचनात्मकता से भरी है
    अब उसकी हर रग

    एक युध्द से भाग कर
    दूसरे युध्द में वो कूद पड़ा
    लेकिन अब इस युध्दभूमि का
    सिकंदर बनने को वो है चल पड़ा

    बस इसीलिए वो लिख रहा है
    औरों से अलग हट कर
    वो अब एक नये रूप मे
    सब को दिख रहा है

    औरों से फासले कम हो जाएँ
    और आ जाए उसके व्यक्तित्व में अंतर
    करने को सबके दिलों मे राज
    लिखता रहेगा वो निरंतर
    बस लिखता रहेगा वो निरंतर

    -Shubham Joshi
    ©ubhayhastkushal