• humanrathore 10w

    एक सुबह ऐसी भी

    वो सुबह कुछ शांत सी थी, एक कहानी को बदलने वाली थी!
    वो सुबह कुछ नाराज़ सी थी, कुछ अल्फ़ाज़ों का दम घुटने वाला था!
    वो सुबह काली थी, लाली भी ग़ायब सी थी उसकी!
    वो सुबह हर रोज़ वाली सुबह नहीं थी, उसमें गलियाँ गुम थी जवाबों की!
    वो सुबह की खोज भी रात के अन्धकारों से घिरी थी, उसमें सच टटोलना मुश्किल था!
    जब मैं खड़ा था उजाले के इंतेज़ार में ,मुझे जगा क्यू गई थी वो सुबह,
    मैंने तो नहीं माँगी थी !

    @human_ki_kalam