• loveneetm 6w

    मदिरालय

    मदिरालय में मद पीकर,
    मानव खुद का विनाश करे,
    उस मय का नशा इतना ज्यादा,
    कि जग उसका उपहास करे।

    आहत होता मन अपनो का,
    यह नही है हल विपदाओं का,
    मद सेवन करना ऐसा है,
    जैसे आमंत्रण हो गुनाहों का।

    ना सुध होता हैं मानव को,
    बस काम क्रोध संचार करे,
    कभी शब्दों का हथियार चले,
    तो कभी मन हिंसा विकार बढ़े।

    जान बूझकर क्यूँ पीना,
    जब पता हैं सब विकार तुम्हे,
    जीवन में सब हल हो जाए,
    जब संयमित करे विचार हमें।
    @लवनीत