• wordsofnishant 10w

    दोपहर बारह बजे के आसपास इंस्टाग्राम पर इरफ़ान खान के निधन की खबर पढ़ी। एकाएक फ़िल्म 'लंचबॉक्स' का वो दृश्य आंखों के सामने आ गया जिसमें इरफान खान द्वारा निभाया किरदार साजन फनेन्डिस मुस्कुराते हुए लंचबॉक्स से निकला हुआ पत्र पढ़ रहे है। तुरंत दोस्तों को व्हाट्सएप्प से ये खबर दी पर ये दृशय दिमाग से नहीं गया।
    फ़िल्म बेहद करीब है, जो मैंने 2018 की सर्दियों में देखी थी। परेशान था शायद किसी बात को लेकर , पर फ़िल्म के बाद कुछ यूँ अच्छा सा महसूस हुआ कि ऐसे ही साईकल पर होस्टल से घूमने बाहर निकल गया था उस शाम।
    आप सोच रहे होंगे ये सब हमें क्यों बता रहा है , असल में उस फिल्म का एक किरदार कहता है , "Life is strange..I think we forget things if we have no one to tell them to''। ये लाइन उस शाम स्टेटस पर भी डाली थी । बस इसलिए बहुत दिन बाद कुछ लिख रहा हूँ क्योंकि भूल जाऊंगा अगर नहीं बताया शायद तो और लिखने की इच्छा भी आई है।
    अगर सोचूं तो इरफान मुझे इंसान के तौर पर तो ध्यान भी ना आये , क्योंकि उनका अभिनय इतना सच्चा और प्राकर्तिक था कि किरदार में वो कभी दिखाई ही नही दिए बल्कि खुद ही किरदार बन गए हो जैसे। क्या अपने कार्यकौशल में इतनी महारत पाना संभव है? अब वो नए किरदार कभी नहीं दिखाएंगे , पर हम पुराने वाले 'सलाम बॉम्बे से अंग्रेज़ी मीडियम' तक के सारे किरदार भुलाये नहीं भूलेंगे। वो दृश्य अभी भी सामने है ये लिखते वक्त , सोच रहा हूँ आज फिर दोबारा 'लंचबॉक्स' देखी जाए , शायद यही मेरी छोटी से श्रद्दांजलि हो, उसके लिए,जो ये सब किरदार छोड़ गया है हमारे लिए :)