• aashpna 34w

    बड़ी उदास है रात,और इसमें गम-ए-दिल तेरा साथ,तेरा शहर और उसकी वो वक़्त -ए-शाम मेरी तन्हाई सी मुझ में रह रही है,अभी कुछ दिनों से मुझमें इक नज़्म चल रही है, पर उसके हर एक लफ्ज़ में जाने क्यों तू नहीं हैं।