• sarimyusuf 9w

    तू पुरानी दिल्ली की गलियों सी कही उलझी रहा,
    में जामा मस्जिद सा दिन में पाँच दफ़ा तुझे बुलाता रहा I

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    तू जमुना के पानी सी रोज़ बदलती रही चलती रही,
    में ताज की तरह तनहा खड़ा समभलता रहा,
    तू बनारस की सड़कों पे कोई अंग्रेज़ सी सबको देख मुस्कुराती रही,
    में गंगा किनारे बैठा साधु बस तुझपे ध्यान लगाता रहा,
    तू पुरानी दिल्ली की गलियों सी कही उलझी रही,
    में जामा मस्जिद सा दिन में पाँच दफ़ा तुझे बुलाता रहा I

    ©sarimyusuf