• komal_sharma 23w

    जिस पिंजरे में कैद करने चाहते हो मुझे
    नहीं बनी मैं उस पिंजरे के लिए
    आज़ादी है माँग मेरी
    खुला आसमान है राह मेरी
    है उड़ना धरती से लेकर अम्बर तक
    भरनी है लम्बी उड़ान मुझे
    नहीं रहना इस जमीन पर
    छूना है नीले गगन को अपने हाथों से
    आज सब नीला कर देना चाहती हूँ


    ©komal_sharma