• shubham_vishwakarma 9w

    mala.ng

    Read More

    तासीर

    उसकी तासीर अब्र की तरह थी ,
    कभी बरसती,तो कभी कड़कती थी,
    कभी धुप से बचती,तो कभी काली खाल सी हो जाती थी,
    उसकी मासूमियत तो रात की चांदनी में होती थी,
    पर दिन-ब-दिन घटती-बढ़ती रहती थी ,
    उसकी तासीर अब्र की तरह थी !!
    "mala.ng"