• rkjpharma2017 11w

    ■कभी सोचा नहीं था■

    ●कभी सोचा नहीं था ऐसे भी दिन आएँगें ,
    ●छुट्टियाँ तो होंगी पर मना नहीं पाएंगे
    ●आइसक्रीम का मौसम होगा पर खा नहीं पाएँगे ।
    ●रास्ते खुले होंगे पर कहीं जा नहीं पाएंगे
    ●जो दूर रह गए उन्हें बुला नहीं पाएँगे
    ●और जो पास हैं उनसे हाथ भी मिला नहीं पाएँगे
    ●जो घर लौटने की राह देखते थे वो घर में ही बंद हो जाएँगे
    ●जिनके साथ वक़्त बिताने को तरसते थे उनसे भी ऊब जाएँगें
    ●क्या है तारीख़ कौन सा वार ये भी भूल जाएँगे
    ●कैलेंडर हो जाएँगें बेमानी बस यूँ ही दिन - रात बिताएँगे
    ●साफ़ हो जाएगी हवा पर चैन की साँस न ले पाएँगे
    ◆नहीं दिखेगी कोई मुस्कुराहट , चेहरे मास्क से ढक जाएँगें ।

    ~राजकुमार जायसवाल