• mohini_uvaach 23w

    " चौथी में थे,गए निकाले कान खींचकर,उससे क्या?
    उंगली पर सब पढ़े-लिखों को अब नचाइए नेताजी.! "

    © मोहिनी_उवाच

    व्यंग्य के साथ गज़ल कहली बार लिखी है ,और इस बीच इधर आना भी कम हो पा रहा है, अतः सुझाव सादर अपेक्षित हैं...����

    किन पर कटाक्ष है और किनका सम्मान,ये तो खैर स्वयं ही समझ जाएंगे..!

    @smriti_mukht_iiha @shriradhey_apt @monikakapur @feelingsbywords @devesh_upadhyay #hind #hindiurdunetwork #hindilekhan

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    जब सत्ता चोर-डाकुओं के बल पे पाइए नेताजी.!
    तब 'डेवलपमेंट' से 'इमेज' को ना गिराइए नेताजी.!

    ये बैनर, इश्तिहार सच्चा बोल आपको गालीं दें,
    तौबा.! कुछ कीजिए, अरे लांछन हटाइए नेताजी.!

    गर जनता संगठित होकर नींव को हिलाना चाहे,
    बस जनता की सभा बुलाकर बाँट आइए नेताजी.!

    जो कोई हो खड़ा विरोधी बांचता 'तरक्की' तो फिर,
    'निष्ठा-विष', 'जाति' के 'ज़हर' से काट आइए नेताजी!

    लाखों की भीड़ है खरीदी,लोरियाँ शुरू कर दीजे,
    'मैनीफैस्टो' परीकथा-सा फिर से गाइए नेताजी.!

    घर का व्यू है बिगड़ रहा,दर पर गरीब जो आए हैं,
    दो दिन बस झोपड़ों में खाकर भूल जाइए नेताजी.!

    बेटी-बेटा बचा करेंगे बाद और सरकारों में,
    सबसे पहले परमप्रिया कुर्सी बचाइए नेताजी.!

    चारा-डाॅलर बिना बिगड़ जाएगा हाजमा दो दिन में,
    खाना खाकर 'लेवल' गिरेगा, देश खाइए नेताजी.!!

    ©मोहिनी झा