• vortex 6w

    महफ़िल में उसकी बातें अक्सर छिड़ जाती है,
    क्या करें जनाब, आलम उसका कुछ ऐसा है,
    मानो रेगिस्तान में बरसात जैसा है,
    उसकी आंखों में दुनिया बस्ती है,
    होठों पर बेधड़क मुस्कान सजती है,
    गालों पे लाली, कानों में बली
    आय हाय! क्या खूब सवरती है,
    क्या बेमिसाल बालों को सहलाती है,
    निगाहों से ही सूरत ए हाल बयान कर जाती है,
    महफ़िल में उसकी बातें अक्सर छिड़ जाती है,
    आंखें ना चाहकर भी उसकी अदाओं से भिड़ जाती है ।।
    ©vortex