• amritpalsinghgogia 10w

    157 लुत्फ़

    चलो न ‘पाली’ लुत्फ़ लेते हैं ज़िंदगी के नज़ारों का
    क्या रखा है भूल भूलैया काम-क्रोध में विचारों का
    मुश्किलों से करते तौबा फिर भी जीवन कहारों का
    पराया धन ढोने का सुख संग लेते लुत्फ़ हज़ारों का

    अमृत पाल सिंह 'पाली'