• andaaz_e_shaayaraana 9w

    इस बात की कहाँ हैरानगी...
    तुम हो कहीं हवाओं में...
    मिलोगी कभी किसी वक़्त के दरमियाँ...
    ज़माने में यूँ तो ख़र्च बोहत हुआ,
    मग़र "अंदाज़" का इश्क़ अभी बाकी है ज़रा फ़िज़ाओं में...

    * "दरमियाँ = बीच में"
    * "फिज़ा = वातावरण"

    - अंदाज़ - ए - शायराना