• shailendrapandey 6w

    Sharp

    जिन्दगी एक फूल को तरस गयी,
    अपनों के एहसास को तरस गयी,
    अब जब चिर निद्रा ,नि:शब्द मौन हो गयी,
    ढूढ़ता रहा खुद को तुझमें,
    जिन्दगी तेरे याद में कहीं खो गयी,
    गर्म अश्क भी तेरे एहसास नहीं देते,
    ये फूलों की बारिश महसूस नहीं होते,
    अफसोस जिन्दगी अकेेली थी,
    और जनाजे में आंसुओं की दरिया बह गयी,
    ©shailendrapandey