• samad12 23w

    मैं हूँ

    खामोशी का समां है और मै हूँ
    बस्ती ए गुमाँ है और मैं हूँ

    इस ज़माने में अब कुछ रहा नही
    मुर्दा हसरतें हैं यहाँ और मैं हूँ

    खामोशी है ज़मीं से आसमां तलक
    किसी की दास्ताँ है और मैं हूँ

    क़यामत है पसरी पूरे आशियाने में
    तलाश ए रहनुमा है और मैं हूँ

    कहाँ है कोई हम ज़बाँ इस वहशत में
    फ़क़त मेरी ज़बाँ है और मैं हूँ

    तलाश है मुझे किसी ज़िंदा तमन्ना की
    बस ज़िंदा मेरी तमन्ना है और मैं हूँ
    ©samad12