• divyarai 30w

    ख़्वाब

    उस रात मैं करवट पलटती रही,
    मैंने देखा कुछ ख़्वाहिशें, बहुत
    तड़प रही थी, मायूस और
    बेजान किसी कोने मे रो रही थी।
    मैंने जब गौर से देखा तो ऊपर
    की ओर कुछ भयानक सा दिखा
    ऐसा लग रहा था कि कोई जंग
    लड़ी गई हो ख्वाहिशों और
    हक़ीक़त के बीच और दाव
    पर लगा था आसमान।
    कुछ देर बाद समझ आया
    कि वो ख़्वाहिशें अनाथ हो
    गई थी। उनके सर पर आसमान
    ही नही था। वो अपने हिस्से
    का आसमाम हार गई थी।
    मैं हैरान सी घबरा कर उठी और
    फिर कभी सो ना पाई...

    #रूह अल्फ़ाज़