• enlivenmonk 18w

    जब सवेरा होता है,
    न जाने क्यों में अँधेरा ढूंढ़ता हूँ।
    जब अँधेरा होता है,
    में उस में ही खो जाता हूँ।
    वेहवार बनाता हूँ, तो रिश्ते टूट जाते हैं।
    रिश्ते खोजता हूँ, सब अनजान हो जाते हैं।
    ज्ञान खोजता हूँ, लुटेरे मिल जाते हैं।
    व्यवस्था खोजता हूँ, तो ज्ञानी मिल जाते हैं।
    सर्कार खोजता हूँ, तो अज्ञानी मिल जाते हैं।
    ख़ुशी खोजता हूँ, तो गम मिल जाता हैं।
    गम में खोता हूँ, तो दोस्त मिल जाता हैं।
    दोस्त खोजता हूँ, तो अँधेरा मिल जाता है।
    ©enlivenmonk(तनवीर)