• amritpalsinghgogia 10w

    112 सकूं

    तपिश सकूं देती है
    जब मौसम ओले बरसाता हो
    ओले भी सकूं देते हैं
    जब मौसम शोले बरसाता हो
    बुरा तभी कहते हैं
    जब हम कहीं अटक जाते हैं
    सोचो ग़लत क्या होगा
    जब मन बहुत घबराता हो
    अमृत पाल सिंह ‘गोगिया’