• abhidilse 27w

    फुर्सत के लम्हों में
    कुछ गीत रच जाता हूं
    कुछ अनकही सी बात
    मैं सबसे कह जाता हूं
    ख्यालों के समंदर में
    रोज डुबकी लगाता हूं
    कुछ मोती निकालता हूं
    कुछ बेकाम छांटता हूं
    ज्ञान का समंदर
    रख रखा अपने अंदर
    अनुभव का रस मिलाकर
    दो घूंट ले लेता हूं
    कागज कलम नहीं अब
    मेरी मिराकी दुनियां
    कुछ आप सबको सुनाता हूं
    कुछ आपकी सुनता हूं
    कितने जज्बात
    पहुंचा दिये लोगों में
    कितनी हसीन बात
    जता दिया है लोगों को
    सीखा भी है बहुत उनसे
    जिनको कृति अपनी दिखाता हूं
    फुर्सत के लम्हों में
    कुछ गीत रच जाता हूं
    कुछ अनकही सी बात
    सबसे कह जाता हूं....